गल्फ़ न्यूज़ के हवाले से समाचार एजेंसी तसनीम ने रिपोर्ट दी है कि, सऊदी अरब द्वारा जिस तरह बाइडेन को बधाई देने में देरी की गई है उससे लगता है कि आले सऊद शासन के शासक एवं अधिकारी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार की अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत से बिल्कुल ख़ुश नहीं हैं। जबकि फ़ार्स की खाड़ी के अन्य देशों एवं अरब देशों ने बाइडेन की जीत पर तुरंत बधाई संदेश जारी किया। सऊदी अरब द्वारा बाइडेन को दी गई बधाई में देरी इस बात को भी दर्शाती है कि आले सऊद शासन, विशेषकर मोहम्मद बिन सलमान, जो ट्रम्प के बहुत नज़दीकी माने जाते हैं, उनकी हार से कितना दुखी एवं चिंतित हैं। इसके विपरीत वर्ष 2016 में जब डोनल्ड ट्रम्प ने चुनाव जीता था तो सऊदी अरब ने बिना समय गंवाए बधाई दी थी। जबकि 2016 के अपने चुनाव प्रचार में ट्रम्प ने सऊदी अरब और आले सऊद शासकों का जमकर मज़ाक उड़ाया था। इस बार ट्रम्प की हार और बाइडेन की जीत को 24 घंटे बीत जाने के बाद भी सऊदी अरब ने नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति को बधाई नहीं दी थी। वहीं दूसरी ओर दुनिया भर के ज़्यादातर देश विशेषकर फ़ार्स की खाड़ी के अरब देश अमेरिकी चुनाव के नतीजे पर नज़र रखे हुए थे और जैसे ही बाइडेन की जीत की ख़बर आई उन्होंने तुरंत उन्हें बधाई संदेश दिया। इस बीच तंज़ानिया के राष्ट्रपति पद के चुनाव में “जॉन मैगोफ़ूली”के दोबारा चुने जाने पर सऊदी अरब द्वारा तुरंत बधाई संदेश दिया गया। इससे सऊदी अरब यह दिखाने की कोशिश कर रहा था कि उसके लिए जो बाइडेन का अमेरिका का राष्ट्रपति चुना जाना कोई अहम बात नहीं है।

क़तर, ओमान, कुवैत, संयुक्त अरब इमारात और बहरैन फ़ार्स की ख़ाड़ी के ऐसे पहले देश हैं जिन्होंने नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति को बधाई संदेश भेजा। लेकिन इस बीच सऊदी अरब में बाइडेन की जीत पर लोगों का ग़ुस्सा ट्वीटर पर देखने को मिला। सऊदी अरब के ट्वीटर यूज़र्स लगातार हैशटैग, प्रिंस, मोहम्मद बिन सलमान के समर्थन में ट्रेंड कर रहे थे। इसी संबंध में सऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार फ़हद अस्सबीती ने अमेरिका में तैनात रहे पूर्व सऊदी राजदूत राजकुमार बंदर बिन सुलतान की प्रतिक्रिया को पुनः प्रकाशित किया। बंदर बिन सुलतान ने इस संबंध में कहा था कि, भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट के समय से अब तक के सारे राष्ट्रपति सऊदी अरब को सम्मान देते आए हैं। उन्होंने कहा कि, कुछ ऐसे राष्ट्रपति कि जिन्होंने अपने चुनाव में सऊदी अरब के लिए उलटा-सीधा बयान भी दिया था वह भी चुनाव जीतने के बाद जब व्हाइट हाउस पहुंचे तो उन्हें समझ में आया कि सऊदी अरब उनका कितना सच्चा दोस्त है। बंदर बिन सुलतान के बयान से उनका ग़ुस्सा साफ़ झलक रहा था।

एक अन्य सऊदी अरब के पत्रकार ने हैशटैग प्रिंस, लिखकर अपने ट्वीट एकाउंट पर कुछ ऐसा लिखा कि जिससे ट्रम्प की हार को लेकर उनका ग़ुस्सा और उनकी चिंता साफ़ दिखाई दे रही थी। इस सऊदी पत्रकार ने लिखा कि, सऊदी अरब अमेरिका के चुनाव नतीजे को महत्व नहीं देता ह, क्योंकि अमेरिका में कौन राष्ट्रपति हो उससे सऊदी अरब पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है। सऊदी पत्रकार ने लिखा कि ताक़त देने वाला ईश्वर है और हम सऊदी अरब के युवराज का सम्मान और समर्थन करते हैं जो ग्रेट सऊदी अरब को नेतृत्व करते हैं। इस बीच कुछ जानकारों का मानना है कि, जो बाइडेन द्वारा अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस बात का एलान करना कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद अरब देशों को लेकर व्हाइट हाउस की नीतियों में बदलाव आएंगे, यही वह कारण है कि सऊदी अरब ने जो बाइडेन को बधाई संदेश देने में देरी की है। साथ ही जो बाइडेन ने यह भी एलान किया था कि उनकी जीत के बाद एक बार फिर सऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या के मामले का केस खुलेगा और नए सिरे से जांच होगी। याद रहे कि जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या में सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान का सीधे तौर पर हाथ होने के कई सबूत सामने आए हैं।